
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक सरकार ने गडग जिले के ऐतिहासिक लक्कुंडी गांव में एक महत्वाकांक्षी पुरातात्विक परियोजना की शुरुआत की है, जिसके तहत 101 प्राचीन कुओं और 101 मंदिरों की पहचान और खुदाई की जाएगी। यह स्थल गंगा और कल्याणी चालुक्य काल के समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है और इसे महत्वपूर्ण विरासत क्षेत्र माना जाता है।
इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय उच्च शिक्षा संस्थान National Institute of Advanced Studies के साथ साझेदारी की है। इस संबंध में बुधवार को वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें तकनीकी और अनुसंधान संबंधी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
कानून और संसदीय कार्य मंत्री H. K. Patil ने इस परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लक्कुंडी में 101 कुओं और 101 मंदिरों की पहचान के लिए आधुनिक सैटेलाइट तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से जमीन के भीतर छिपी संरचनाओं का पता लगाकर उन्हें वैज्ञानिक तरीके से सामने लाया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में शुरू किए गए पुरातात्विक अन्वेषण के दौरान अब तक 70 स्मारकों की पहचान की जा चुकी है। इनमें 32 मंदिर, 28 प्राचीन कुएं और 7 अन्य महत्वपूर्ण विरासत संरचनाएं शामिल हैं। यह खोज इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक उजागर करती है।
सरकार का लक्ष्य है कि 31 दिसंबर तक शेष सभी 101 कुएं और 101 मंदिरों की पहचान पूरी कर ली जाए और उन्हें संरक्षित किया जाए। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम लगातार क्षेत्र में सर्वेक्षण और तकनीकी विश्लेषण कर रही है।
परियोजना में सैटेलाइट इमेजिंग के साथ-साथ भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और पुरातात्विक अध्ययन का भी सहारा लिया जा रहा है, ताकि जमीन के नीचे मौजूद संरचनाओं की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के उपयोग से छिपी हुई ऐतिहासिक धरोहरों को तेजी से और अधिक सटीक तरीके से खोजा जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल पुरातात्विक खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास से भी जोड़ा जा रहा है। लक्कुंडी को एक प्रमुख विरासत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के सफल होने पर लक्कुंडी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
कुल मिलाकर, यह पहल तकनीक और इतिहास के संगम का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है, जो कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।





